Thursday, September 6, 2012

जो मानो उसको

जो मानो उसको.... तो वो हर कहीं है,

कहते है लोग

ये उसी का आसमान है
ये उसी की जमीन है.....

अभी-अभी यहाँ हैं,

और अभी ओर कहीं हैं....

वो सिर्फ हमारा ही नहीं,


कई ओरों का भी है....

देखो उसके करिश्में

जो दिखते हर कहीं है.........

ये शब्द खिलौना बन कर हमेंशा

ये शब्द खिलौना बन कर हमेंशा से ही ...मेरे साथ खेलते रहें है.....
मुझे चुप रहना अच्छा लगता है ...पर ये शब्द हमेशा ही बोलते रहे है.....

मैंने हर एक दर्द को दफना दिया है दिल ही में.....
पर ये शब्द धोखे से मेरा हर राज़ खोलते रहें है......

जब-जब ये शब्द फूटते है मेरे मुंह से, कई लोग हंस पड़ते है........
ये सच है की हकीकत पर किसी को जल्दी से भरोसा नहीं होता......

यूँ खुद से होना अनजान अच्छा नहीं

यूँ खुद से होना अनजान अच्छा नहीं,
यूँ किसी से भी बढ़ाना पहचान अच्छा नहीं....

ये दुनिया है दो सोंच वालो की,
यहाँ एक पहचान बनाना अच्छा नहीं......

हर बात में सिर्फ कमियां ही देखी जाती है.....
यूँ तो किसी को बुरा बताना अच्छा नहीं....

छोड़कर कल्पना

छोड़कर कल्पना,
वास्तविकता पर उतर आओ,

जो अच्छा हुआ है अबतक,
सिर्फ उसे ही याद रखो......

बचा जो कुछ है बुरा...
छोडो भी उसे अब सब भूल जाओ..........

मुझे भरोसा है

मुझे भरोसा है कि आज भी दुनिया
ख़ूबसूरत है.....

और कविता रोटी की तरह सबकी

ज़रूरत है......!!

एक कविता पढकर, किसी का खून
उबाल खाता है....

तो कोई मोम बनकर पिघल

भी जाता है......!!

कभी ये कविता क्रांति तक

ला देती है....

कभी ये हर शोर मिटा कर,

शांति फैला देती है......!!

माना इसमें नदिओं सा

वेग नहीं है....

पर ये कागज की छाती पर लिखा,

केवल एक लेख नहीं है.......!!

इसकी सीमा अंतरिक्ष से भी

अनंत है.....

ये प्रेम, शांति, अहिंसा,

और सत्यता का ग्रन्थ है........मोहनिश.....!


Friday, August 3, 2012

हर किसी के सामने सिर झुका दूँ....????

हर किसी के सामने सिर झुका दूँ,
इतना भी मजबूर .......मैं इंसान नहीं.........

तू होगा कई गुलामों का आका,
पर है तो एक इंसान ही.....कोई भगवान नहीं......मोहनिश....!!

Tuesday, July 3, 2012

हृदय एक दर्पण बन जाए

काश... की मेरा हृदय एक दर्पण बन जाए....
जो टूटने पर भी सौ प्रतिबिम्ब दिखाए......

काश....की मेरा मन जुगनू हो जाए....
अंधेर नगरी में जो राह दिखाए.....

काश....की मेरा करुण अतीत बदल जाए....
और वर्तमान सुख की लहरों से खेलता नजर आए........मोहनिश......!!