मैं आज भी जीवित हूँ,
पहले से अधिक पवित्रता,
पूर्णता के साथ.......!!
यही पवित्रता और पूर्णता
मुझे अन्य जीव-जंतुओं से
अलग करती है ......!!
मैं अपने में समेटे हूँ,
कई और भी रूप,
जो मुझे सार्थक बनाते है.....!!
मेरे विवेक को प्राप्त है,
दृष्टि, जो मुझे जीवन
से जोड़कर रखती है......!!
और यही जीवन है,
जो मुझे राख होने से
अब तक रोके हुए है..............मोहनिश........!!
अलग करती है ......!!
मैं अपने में समेटे हूँ,
कई और भी रूप,
जो मुझे सार्थक बनाते है.....!!
मेरे विवेक को प्राप्त है,
दृष्टि, जो मुझे जीवन
से जोड़कर रखती है......!!
और यही जीवन है,
जो मुझे राख होने से
अब तक रोके हुए है..............मोहनिश........